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राजस्थान भूगोल को कैसे पढ़े ? राजस्थान भूगोल सरल विषय होने के साथ अधिक अंक प्राप्त करवाने वाले विषय में है। RAS, REET, RPSC, RSMSSB की विभिन्न परीक्षाओं में इस विषय का भारांश अधिक है। हाल ही में नए जिलों का गठन होने के कारण भूगोल में विषय में परिवर्तन हुआ है। इसीलिए वर्तमान समय में भूगोल को वैज्ञानिक व्यवस्थित पढ़ने की जरूरत है। (1) शुरुआत में - नए मानचित्र और प्रशासनिक बदलाव की समझ। - भूगोल विषय को रटने के बजाय हमें समझना चाहिए (और शुरुआत में मानचित्र की समझ होनी चाहिए) - मानचित्र का अभ्यास - बाजार से कम से कम 10-20 खाली मानचित्र खरीदकर लाएं। एक मानचित्र को पूर्णतः देखकर सभी जिलों को यथास्थान पर अंकित करे। - नए जिलों को चिह्नित करके पुराने जिलों के हिस्सों का ध्यान रखना क्योंकि कई जिलों से अलग-अलग स्थान नए जिलों के रूप में सृजित होने के कारण कुछ नए जिले भी आ गए हैं। - सीमावर्ती जिलों तथा आंतरिक जिलों का ज्ञान होना अनिवार्य है। - सभी जिलों का बार-बार अंकन करे। (2) पाठ्यक्रम का वर्गीकरण - राजस्थान भूगोल के सभी भागों को एक साथ पढ़ने के बजाय कुछ अलग-2 इकाइयों में बांट लेना चाहिए। अलग-2 हिस्सों को क्रमित रूप से पढ़ना चाहिए। सर्वप्रथम: भौतिक और प्राकृतिक भूगोल विशेषताओं को पढ़ना - - भौतिक प्रदेश राजस्थान की भूगोल का आधार है। यदि इसी पर अपनी समझ अच्छी होती है भूगोल विषय सरल हो जाएगा। इसी में महत्वपूर्ण तथ्य ध्यान होने चाहिए जैसे - "स्थिति एवं विस्तार में राजस्थान की अक्षांशीय व देशान्तरीय विस्तार राजस्थान का उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व पश्चिम विस्तार को ध्यानपूर्वक पढे। भौतिक प्रदेश मे - राजस्थान के भौतिक प्रदेश को चार भागों में बाँटा है। पश्चिम राजस्थान के भौतिक प्रदेश। I ① पश्चिम रेतीला मरूस्थल - बालुका स्तूपों के प्रकार का अध्ययन करें ② अरावली पर्वतीय प्रदेश - अरावली का विस्तार, उत्पत्ति तथा राजस्थान में कितना हिस्सा है, तथा विभिन्न चोटियों व ऊँचाईयों को याद करें-) ③ पूर्वी मैदान - चम्बल, माही, बेसिन का अध्ययन करें) ④ दक्षिण-पूर्वी पठार छ हाडौती का पठार) - दक्कन का पठार, विन्ध्यन कगार भूमि का अध्ययन करें-) * अपवाह तंत्र और जल संसाधन - अपवाह तंत्र को पढने नए जिले घठित होने के कारण काफी प्रभावित हुआ-। अध्ययन करेंगे। -> आंतरिक प्रवाह की नदियाँ- चम्बल, बनास, बेडच, कोठारी, काली सिंध, • रहे। तथा इन नदियों के उद्गम स्थल के बारे में - आंतरिक प्रवाह की नदियाँ- घग्घर काँतली, काकनेय, साबी नदियों का उद्गम व विस्तार के बारे में अध्ययन करें। • बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ- चम्बल, बनास, बेड़च, कोठारी, कालीसिंध, काली सिंध । इनके उद्गम स्थल व सहायक को मानचित्र की सहायता से पढें। • अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ - लूणी (वाटेमेक्स), माही, साबरमती, पश्चिमी बनास नदियों का उद्गम स्थल, सहायक नदी को मानचित्र की सहायता से पढें। • झीलें एवं बाँध-मीठे पानी की झीलें तथा खारे पानी की झीलें तथा बहुउद्देशीय परियोजना व इंदिरा गाँधी नहर परियोजना बर - चम्बल परियोजना, माही बजाज सागर परियोजना के बारे में जरूर पढ़ें। * जलवायु, वनस्पति, मृदा और वन संपदा: 1. जलवायु - राजस्थान की जलवायु (शुष्क, अर्धशुष्क) के साथ कोपेन के वर्गीकरण से थॉर्नथ्वेट और ट्रिवार्थी के वर्गीकरण से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। और क्षेत्र विस्तार व सांकेतिक नाम का अध्ययन करना आवश्यक है। 2. मृदा - पारंपरिक मृदा वर्गीकरण के अलावा वैज्ञानिक वर्गीकरण: इनसेप्टिसोल, अल्फीसोल, एरीडिसोल, वर्टीसोल, एंटीसोल को उनके क्षेत्रों के साथ अध्ययन करना आवश्यक है और इनके पाए जाने वाले क्षेत्र। 3. वनस्पति - नवीनतम सरकारी वन रिपोर्ट, राजस्थान में वनों का प्रतिशत, सर्वाधिक व न्यूनतम वन जिलों का अध्ययन आवश्यक है। तथा राष्ट्रीय उद्यान व टाइगर रिजर्व और वन्य जीव अभ्यारण्य संबंधित जिलों का ध्यान होना आवश्यक है। * आँकड़ों आधारित टॉपिक: 1. खनिज - खनिजों का अजायबघर राजस्थान को कहा जाता है। तथा राजस्थान भूगोल में यह टॉपिक महत्वपूर्ण है। राजस्थान संबंधित जितने भी परीक्षा होती है, इसमें इस टॉपिक से एक या उससे अधिक प्रश्न देखने को मिलते हैं। खनिज टॉपिक को पढ़ते समय महत्वपूर्ण बातें - खनिजों का विभाजन (धात्विक व अधात्विक), खनन क्षेत्र की सारणी बनाकर मानचित्र द्वारा अध्ययन करें। 2. कृषि एवं पशुपालन - प्रमुख फसलें (बाजरा, सरसों, ग्वार में राजस्थान का स्थान), कृषि जलवायु प्रदेश, पशुजनगणना तथा गोवंश, भेड़, बकरी, ऊँटों की नस्लों का अध्ययन करें। 3. उद्योग एवं परिवहन - सूती वस्त्र, चीनी, सीमेंट उद्योगों के बारे में अध्ययन करें। रीको (RIICO), राजसीको (RAJSICO) जैसी संस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करें। एवं परिवहन में राज्य व राष्ट्रीय राजमार्ग के नंबर तथा गुजरने वाले क्षेत्रों का अध्ययन करें। मानव भूगोल - 1. जनगणना व जनजातियां - जनगणना के आँकड़े पुराने हों परन्तु जब तक नई जनगणना के आँकड़े न आएं तब तक पुराने आँकड़ों को पढ़ना चाहिए। जनसंख्या वृद्धि, घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता के जिलों का क्रम ध्यान रखें। 2. जनजातियों - मुख्य रूप से मीणा, भील, गरासिया, सहरिया, डामोर, कंजर; इनका भौगोलिक वितरण और सांस्कृतिक विशेषताओं का अध्ययन करना आवश्यक है। * अध्ययन की तकनीक - किताब को कई तरीकों से पढ़ना होगा: 1. मानचित्र से पढ़ाई - राजस्थान की भूगोल पढ़ते समय हाथ में मानचित्र रखें। जिस क्षेत्र विशेष का अध्ययन कर रहे हों उसे मानचित्र में देखें तथा खाली मानचित्र वाले स्थान में भरें। 2. तुलनात्मक सारणियाँ बनाएं - जैसे खनिज पढ़ रहे हो तो एक जगह खनिज का नाम तथा दूसरी जगह उससे संबंधित क्षेत्र होने चाहिए। 3. आर्थिक समीक्षा - यह सरकारी आँकड़ों की किताब है जहाँ हर साल सरकारी आँकड़े जारी किए जाते हैं। 4. रिवीजन - भूगोल भूलने वाले विषय हैं और उसे बार-बार पढ़ना होगा। भूगोल विषय को प्रतिदिन 1 घंटा रिवीजन के लिए देना चाहिए। * प्रमाणित पुस्तकें - - कक्षा 9 से 12 की RBSE की पुस्तकें। - प्रमाणित पुस्तकें - हरिमोहन सक्सेना (हिन्दी साहित्य अकादमी)। - रिवीजन के लिए कोचिंग नोट्स की सहायता ले सकते हैं। * पिछले वर्षों के प्रश्न और टेस्ट - - टॉपिक खत्म होने के बाद पिछले वर्षों के उस टॉपिक से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करना चाहिए। - किसी भी टेस्ट सीरीज़ के माध्यम से अभ्यास कर सकते हैं। - परीक्षा से पहले अधिक टेस्ट देवें। निष्कर्ष - नक्शा, नोट्स, प्रमाणित आँकड़े और बार-बार रिवीजन करना ही इस विषय पर अच्छी पकड़ बना सकता है।